आओ प्रगति करें, अपना अधिकार जाने
🔹 FIR का महत्व (Exam Point – LLB के लिए)
आपराधिक प्रक्रिया की शुरुआत FIR से होती है
यह साक्ष्य का महत्वपूर्ण दस्तावेज है
FIR में देरी होने पर अदालत संदेह कर सकती है
FIR substantive evidence नहीं है, लेकिन corroborative evidence के रूप में उपयोग होती है
जमानत (Bail) —जमानत और बंध पत्र के संबंध में भारतीए नागरिक सुरक्षा संहिता के अध्याय 35 में प्रावधान है जो धारा 478से496 तक में उल्लेख है ।जमानत को सरल तरीके से इस तरह समझा जा सकता है -(अपराधी) व्यक्ति को अदालत या पुलिस द्वारा कुछ शर्तों के साथ अस्थायी रूप से रिहा करना या छोड़ना है। ताकि वह जेल से बाहर रहते हुए अपने मुकदमे(केस ) को क़ानूनी प्रक्रिया के अनुसार सामना कर सके। वह कोर्ट में तय तारीख पर उपस्थित होगा ,पुलिस जांच(परीक्षण)और कोर्ट ट्रायल में सहयोग करेगा। जमानत के प्रकार-1. बेल योग्य (Bailable Offence)-ऐसे अपराध जिनमें जमानत मिलना अधिकार (Right) होता है। कुछ मामले ऐसे होते हैं जो पुलिस थाने में ही जमानत मिल सकती है। उदाहरण: साधारण मारपीट, छोटी चोरी के अपराधों में यह प्रावधान अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अध्याय 35 में भी दिया गया है। 2. गैर-बेल योग्य या अजमानतीय अपराध(Non-Bailable- Offence)-इसमें जमानत का अधिकार नहीं, बल्कि कोर्ट की मर्जी पर निर्भर करता है !गंभीर अपराध जैसे हत्या, बलात्कार,लूट,डकैती,अपहरण आदि। जमानत कोर्ट ही देता है। 3. अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) -गिरफ्तारी से पहले ली जाती है यदि व्यक्ति को पुलिस से डर है कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है और जेल जाना पड़ सकता है। सत्र न्यायालय या हाई कोर्ट से मिलती है। 4. अंतरिम जमानत (Interim Bail)-"यह एक अस्थायी जमानत है, जो जब तक नियमित जमानत पर फैसला न हो, तब तक कुछ समय के लिए दी जाती है।" जमानत मिलने की शर्तें-कोर्ट जमानत देते समय ये बातें देखता है:-अपराध की गंभीरता कितनी है ,आरोपी(अपराधी) का पिछला रिकॉर्ड कैसा है आरोपी भाग सकता है या नहीं। जमानत बॉन्ड (Bail Bond)-आरोपी को एक निश्चित राशि का बॉन्ड/जमानत राशि जमा करनी होती है। कभी-कभी जमानत (surety) भी देना होता है । जमानत रद्द कब होती है-आरोपी(अपराधी)कोर्ट में उपस्थित न होने पर,शर्तों का उल्लंघन करने पर,गवाहों को प्रभावित करने पर उसका जमानत रद्द हो सकती है।
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जमानत क्या है?




